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मेरी कुँवारी गाण्ड की चुदाई
हैलो मेरा नाम रमेश है.. मेरी उम्र 24 साल है, मैं गुजरात का रहने वाला हूँ।

मुझे लड़कियों के कपड़े पहनने बहुत पसंद हैं। मैं अपनी दीदी की ब्रा और पैन्टी पहन कर अपने आपको आईने में देख कर खुद ही शर्मा जाता हूँ।

मेरी गाण्ड किसी लड़की जैसी बड़ी और गोल-गोल है।

मैं आज आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

बात उन दिनों की है.. जब मेरी कोलकाता में नई-नई जॉब लगी थी।

कंपनी ने मुझे रहने के लिए एक फ्लैट दिया था.. जहाँ मैं अकेला रहता हूँ।
अभी मेरा कोई दोस्त नहीं बना था इसलिए जॉब से वापस आने के बाद में इंटरनेट पर लड़कों के साथ चैटिंग करता था।




सभी लड़के मेरी नंगी गाण्ड देखना चाहते थे और मैं भी उसे अपनी गाण्ड दिखा कर मज़े लेता था।
ऐसे ही एक दिन मुझे एक लड़का मिला.. जिसका नाम तुषार था।

वो भी कोलकाता का ही रहने वाला था.. उसने नेट पर मुझे अपना बड़ा लण्ड दिखाया। उसके लण्ड को देखते ही न ज़ाने क्यों मेरी गाण्ड में खुजली जैसी महसूस होने लगी।

मैं उसे मटका-मटका कर अपनी गाण्ड दिखा रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मुठ मार रहा था।

फिर उसने मुझसे कहा कि वो मेरी गाण्ड मारना चाहता है।

मैं घबरा गया.. क्योंकि इसके पहले मैंने किसी से अपनी गाण्ड नहीं मरवाई थी।

मैंने उसे ये बात बताई तो उसने कहा- उसमें डरने वाली कोई बात नहीं है.. मैं ये पहले भी कर चुका हूँ.. मैं तुझे गाण्ड मरवाना सिखा दूँगा।

मैंने कहा- ठीक है।

फिर मैंने उसे अपना पता दिया.. उसने कहा- मैं 30 मिनट में पहुँच रहा हूँ।

उसकी बात सुन कर मेरे दिल में न ज़ाने क्यों अजीब से सनसनी सी महसूस होने लगी।

मैं बाथरूम में गया.. और दाढ़ी बनाने की क्रीम ली। फिर उसको अपने पूरे बदन पर लगाया.. खास करके अपनी गाण्ड पर लगाई।
फिर रेजर से पूरे शरीर के बाल निकाल दिए।

अपने चिकने बदन को देखकर मैं खुद ही शर्मा गया.. फिर फुव्वारे के नीचे खड़े होकर नहाने लगा। मैं नहा कर बाहर आया.. तभी दरवाजे की घन्टी बजी.. मेरा दिल धड़कने लगा।

मैं तौलिया लपेट कर दरवाजा खोलने के लिए गया।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो मेरे सामने एक 25 साल का गोरा-चिट्टा लड़का खड़ा था.. वो मुझे देख कर मुस्कुराया।

शायद वो मुझे पहचान गया था, वो तुरंत लपका और मेरे होंठों पर चुम्बन करने लगा।

मैं कुछ समझूँ.. उसके पहले ही उसने दरवाजा बंद कर दिया और फिर से मेरे होंठों को चूसने लगा।

मैं बता नहीं सकता.. मुझे कितना मज़ा आ रहा था।

फिर उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और कमरे में ले गया.. मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।

उसने मेरा तौलिया खींच लिया.. मुझे नंगा देख कर वो पागल हो गया और मेरे पूरे बदन को चूसने लगा।

वो अपने साथ एक बैग लाया था… उसने मुझे वो बैग थमा कर बोला- जा बैग में से कपड़े निकाल ले और उन्हें पहन कर आ…

उस बैग में एक लाल ब्रा.. एक काली पैन्टी और एक लाल रंग की नाइटी थी।

मैं झट से बाथरूम में गया और कपड़े पहनने लगा।

जब मैं उसे पहन कर बाहर आया तो वो मुझे देखते ही रह गया।
उस वक्त मैं कोई लड़की से भी ज़्यादा सुंदर लग रहा था।
नाइटी के नीचे से मेरी गोरी चिकनी जांघें दिख रही थीं जो कोई लड़की जैसी ही थीं।

वो मेरे पास आया और अपनी बाँहों में भर लिया और फिर से चूमने लगा।

मैं तो जैसे स्वर्ग में ही पहुँच गया था।

वो मेरे पूरे बदन पर अपना हाथ फिरा रहा था फिर धीरे से असने अपना एक हाथ पीछे से मेरी पैन्टी में डाला और मेरी गोरी चिकनी गाण्ड को सहलाने लगा।

मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।

वो बोला- आज मैं तुझे अपनी रंडी बना कर तेरी गाण्ड मारूँगा।

हम दोनों बिस्तर पर आ गए, उसने अपने कपड़े निकाल दिए..

उसका लंबा काला लण्ड देख कर तो मेरे होश उड़ गए.. उतना बड़ा लण्ड मेरी गाण्ड में कैसे जाएगा.. मैं अभी यही सोच रहा था कि तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूंस दिया और बोला- चल भोसड़ी के.. लौड़ा चूस…

मैं उसने पास उपने घुटनों के बल बैठ गया और उसका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

उसके लण्ड का नमकीन स्वाद मुझे बहुत पसंद आया और मैं बड़े मज़े से उसे चूस रहा था।

वो मेरा सर पकड़ कर धीरे-धीरे धक्का दे रहा था।

मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.. करीब 15 मिनट तक लौड़ा चुसवाने के बाद उसने कहा- चल.. अब खड़ा हो ज़ा.. अब मैं तुझे चोदूँगा।
मैं उसके सामने अपनी गाण्ड खोल कर अपने हाथ और पैर के सहारे कुतिया जैसे हो गया। उसने पीछे से मेरी गाण्ड को सहलाया और फिर चूसने लगा.. मुझे बड़ा मज़ा आया।

फिर उसने क्रीम की शीशी खोल कर उसमें से ढेर सारी क्रीम निकाल कर मेरी गाण्ड के छेद पर लगा दी।

फिर उसने अपनी एक ऊँगली मेरी गाण्ड के छेद पर रख कर धीरे से उसे अन्दर डाल दी.. मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ.. पर साथ में मज़ा भी आया।

वो अब अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर कर रहा था.. मुझे उसकी ऊँगली से ही बहुत ही मज़ा आ रहा था।

मैंने बोला- तड़पा मत.. चल अब चोद दे…

वो बोला- ठीक है.. ले अब..

फिर वो खड़ा हुआ और फिर से ढेर सारी क्रीम मेरी गाण्ड पर लगा दी।

फिर उसने अपना बड़ा लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर रखा.. मैं उसके गरम सुपारे को मेरी गाण्ड पर महसूस कर रहा था।

उसने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा।

‘आईईई ईईईईई…’
मेरे मुँह से चीख निकल गई.. मैंने देखा तो उसका आधे से ज़्यादा लण्ड मेरी गाण्ड के अन्दर था.. मुझे बहुत दर्द हुआ।

मैं बोला- निकाल ले साले.. मेरी गाण्ड फट गई.. आईई ईईईई…

उस दिन मुझे ये समझ में आया कि गाण्ड फटना किसे कहते हैं। मैं दर्द से कराहता रहा लेकिन उसने अपना लण्ड नहीं निकाला और ज़ोर से दूसरा धक्का मारा।

मेरी तो जैसे जान निकल गई.. मेरी आँख में से पानी निकलने लगा.. उसका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में फंस चुका था।

इधर मैं रो रहा था और मैं धीरे-धीरे मेरी गाण्ड को सहला रहा था.. मैं उसके लण्ड को अपने अन्दर पूरा महसूस कर सकता था।

लगभग 5-6 मिनट तक हम वैसे ही पड़े रहे.. फिर उसने धीरे-धीरे अपना लण्ड बाहर निकाला और फिर से ज़ोर से धक्का मारा..

मुझे फिर दर्द हुआ.. लेकिन पहले जितना नहीं…

अब वो धीरे-धीरे अपना लण्ड अन्दर-बाहर कर रहा था.. कुछ देर बाद दर्द पूरा गायब हो गया और मुझे मज़ा आने लगा।

मैं बोल उठा- चोद मुझे.. और ज़ोर से चोद…

यह सुनते ही उसने अपनी गति बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।

मैं तो जैसे स्वर्ग में ही पहुँच गया था.. मेरे मुँह से आवाजें आनी लगी थीं।

‘आह.. आहह.. आअहह.. आआअहह और ज़ोर से आहह.. चोद मुझे आहह.. मुझे अपनी रंडी बना दे आह.. फाड़ दे मेरी गाण्ड चोद.. आआअहहा..’

मैं जैसे पागल हो गया था.. मुझे नहीं पता था कि मैं क्या बोल रहा हूँ।

उसने अपना एक हाथ नीचे से मेरी ब्रा में डाल दिया और मेरी चूचियों को दबाने लगा और दूसरे हाथ से उसने मेरी गाण्ड पर ज़ोर से थप्पड़ मारा.. मुझे अजीब सा मज़ा आया।

ये एक ऐसा दर्द था.. जो मुझे मज़े दे रहा था। वो ज़ोर-ज़ोर से मेरी गाण्ड पर अपने हाथ से थपेट मारने लगा मेरी गाण्ड लाल हो गई थी लेकिन मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।

मैं चिल्ला रहा था- और ज़ोर से.. और ज़ोर से…

करीब 15 मिनट तक वो मुझे ऐसे ही कुतिया बना कर चोदता रहा और फिर एक ज़ोर का धक्का मारके मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।
मुझे लगा कि जैसे मेरी गाण्ड में किसी ने गरम लावा डाल दिया हो।

वो थक कर मेरी गाण्ड के ऊपर ही लद गया। मैं भी 30 मिनट की जबरदस्त चुदाई से थक गया था।

फिर उसने अपना लण्ड निकाला और मेरी बाजू में लेट गया.. मैंने अपनी गाण्ड देखी तो वहाँ पर एक बड़ा सा छेद बन गया था और उसमें से थोड़ा सा खून भी निकल रहा था.. पता नहीं क्यों उसे देख कर मैं शर्मा गया।

हम करीब 20 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसका लण्ड फिर से तन गया।

वो बोला- आओ एक राउंड और हो ज़ाए।

मैंने उसके सामने आँख मारी.. वो समझ गया।

वो वैसे ही बिस्तर पर लेट गया.. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसका लण्ड पकड़ कर अपनी गाण्ड में डाल लिया।

इस बार वो बड़ी आराम से अन्दर चला गया मैं उसके ऊपर अपनी गाण्ड पटक कर चुदने लगा।

अब उसने मेरी नाइटी निकल दी और ब्रा के अन्दर हाथ डाल कर मेरी चूचियाँ दबाने लगा।

वो नीचे से धक्के मारने लगा और मैं ऊपर से अपनी गाण्ड पटकने लगा।

हम दोनों पसीना-पसीना हो गए थे.. करीब 20 मिनट तक उसने मुझे चोदा और मेरे मुँह में झड़ गया। मैंने उसका सारा पानी पी लिया.. अब मैंने अपनी पैन्टी पहन ली और नाइटी भी पहन ली और उसके साथ सो गया।

सुबह जब हम जागे तब मैं ठीक से चल भी नहीं सकता था.. इसलिए मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली और तुषार से बोला- तुम आज यहीं रुक जाओ.. हम खूब मज़े करेंगे।

वो बोला- कोई बात नहीं..

फिर उसने मुझे उस दिन 4 बार चोदा.. मैं दो दिन तक ऑफिस नहीं जा पाया.. उस दिन की कहानी आपको मैं फिर कभी बताऊँगा।


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